आ जाओ फिर तुम

कुछ  गहरी खाईया खोद रही है हम दोनों ने अपने दरमियान ,
जबकि फासला सिर्फ कुछ बोलो ,कुछ बून्द आँसुओ भर का है,
बेबसी तुमको भी है , बेक़रार मैं भी हूँ,
हया की दलदल में तुम भी हो,
जस्बातो के बवंडर में लड़खड़ाता  मैं भी हूँ |

 

न जाने कब हम बोलेगे , गांठ अपने दिलो की खोलेंगे ,
पहल का इंतज़ार मुझको भी है ,
और मुझ से बेक़रार तुम भी हो ,
कनखियों से ताकना मैंने भी देखा है,
नज़रे चुराके निहारना ,तुम ने भी पकड़ा है,

 

ये लुकाछिपी ,
ये अंतहीन पहले खेल,
मुझ से मैं को न हटा पाना , न जाने कहा तक
हम दोनों को ले जायेगा |

 

पर मैं , ज़िन्दगी भर तिलमिलाने , खुद ही खुद में बिलबिलाने ,
कब्र तक की बेबसी , खुद ही खुद में बुदबुदाने ,
वज़नों को सीने पर ढ़ोने से बेहतर ,
मैं कहता हूँ ,
आ जाओ फिर तुम , बस और नहीं  |

 

 

© Abhishek Yadav 2017

Image Source – www.google.co.in

अक्शो का तिलिश्म

रो सकते तो क्या सुकून होता दिल को ,
इस तरह सरे आम , लिख कर ,
जस्बातो की नुमाईश न करनी पड़ती ,

 

बड़े किस्मत वाले है वो ,
रखते है दरिया-ए-अक्श,
यु पत्थर-दिल कहला कर,
रुसवाई हासिल न करनी पड़ती ,

 

गर पहले  समझ जाता इन अक्शो का तिलिश्म ,
तो  रुसवाई यार की सहनी न पड़ती ,
वक़्त पर कर लेता  कागज पर बंद , अपनी बेबसी का नाच ऐ,
मुहब्बत अपनी , रुसवा  न करनी  पड़ती  |

 

© Abhishek Yadav 2017
image source – www.google.co.in

जुग़नू

खवाब भी मेरे थे ,मंजिल भी मेरी थी,
तुम आये तो ज़िन्दगी में रोशनी सी थी,
समझ न सका साथ जुग़नू का ,
जब रोशन मेरी मंजिल थी |

 

कदर न कर सका रौशनी का , जो साथ थी मेरे ,
हवश में था , चाँद के रौशनी में मैं तो ,
वो तो चाँद था , छुप गया , बादलों में तो,
ना तो चाँद मिला , ना मंजिल मेरी |

 

बेहया सा अब , जुग़नू की तलाश करता हूँ,
सीने में जस्प *कर लूंगा , आ मिल तो  मुझे |
जस्प*- अवशोषित  (absorve)

 

© Abhishek Yadav -2017
image source – www.google.co.in

मैं तुम्हारे साथ हूँ

आगे चलो ,
क्यों की , पीछे सिर्फ इतिहास बैठा है ,
कुछ लोग, कुछ बाते,कुछ कड़वी, कुछ मीठी यादें,
ये सब बीते वक़्त की यादें है ,जो दब रही है वक़्त के गर्त में |

 

छोड़ दो, इन गर्दो को, उड़ जाने दो ,
मलबे से गुम्बदे तामील नहीं होती ,
टूटे आईने में शकले नहीं दिखती ,
फूटे प्याले की दरारें, कभी नहीं भरती ,
इन बीते यादों, से बच जाता है तो सिर्फ ,
मायूस,बेबस , जिरह खारदार यादों की ,

 

 

आओ आगे, मेरे साथ , फिर से मिल कर ,
ताना-बाना,बुनेगें आने वाले वक़्त का ,
खाका खीचेंगे उजले मुस्तकबिल का ,
तुम एक कदम भरो तो सही ,
मैं तुम्हारे साथ हूँ |

 

तामील- अमल, जिरह- पूछताछ , खारदार- काँटेदार, मुस्तकबिल- भविष्यकाल

धुंधले साये

28972027554995ef43e0b58a189b4e09
कोहरे की घनी दिवार के पीछे के ; धुँदले साये ,
कभी आना मेरे पास ,बड़ी शिद्दत से इंतज़ार है ,
तुम्हारे दीदार का |

 

बेपनाह बेबसी है ,तुम्हारे दीदार की ,
कुर्बान की है नींदे,रंगीन सपने देख कर न जाने कितनी रातें की ,
गुलाबी रेत पर अनगिनतों खाका खींचा ; तुम्हारी शक्ल की  |

 

आ जाओ मेरे पास ,बिन झिझक, बिन हिचक के ,
अपने कदमो को आज़ाद कर के,
मेरे पास बिन देर किये |

 

 

या फिर अशआर बता दो मुझे ,
मेरे धुंधले ख्वाबो के पार जाकर,
तुम्हे आगोश में भरने का |

 

© Abhishek Yadav-2017

Image source –www.google.co.in

शिद्दत – प्रबलता,  दीदार- साक्षात्कार,  अशआर-रहस्य

मैं चलता हूँ….

आज फिर ख़ुद को बेबस  महसूस करता हूँ,
कल भी कुछ नहीं था ,आज भी कुछ नहीं है ,
फिर भी कारवाँ लूटने से डरता हूँ |

 

मेरी तन्हाई मुझे सोने नहीं देती ,ख्वाबो की गर्माहट ;मुझे रोने नहीं देती ,
काश , मैं भी अपनी बेबसी का ठीकरा दूसरो  के सरो पर फोड़ पाता,
अपनी शिकस्त  को बदनसीबी ठहराह पाता,
पर अफ़सोस है |

 

अपना कारवाँ,  खुद मैंने ही पाया है ,
कुछ छूट,कोई रूठा ,कुछ पाया, कुछ को मनाया ,
किसी का प्यार, किसी की ठुकराई , खुद उलझा, खुद सुलझाया है |

 

अब क्या करू , रुक पाने की मेरी सोहबत नहीं ,
अब तो आदत सी पड़ गयी है , फकीरी में सिकंदर बन मुस्कुराने की ,
चलो चलता  हूँ, बहुत अरमान है चुमकारने को ,
बहुत से बुर्ज बाकि है नाप आने को |

 

© Abhishek Yadav -2017

Image source – www.google.co.in

सोहबत- संगत,  अरमान- इच्छा, चुमकारने-चूमना, बुर्ज- गुंबद

 

हमारे ख्वाब

ख्वाब जो कुछ हम  ने देखे थे ,

तुम्हारे  लिए , मेरे लिए , और हमारे लिए ,

 

 

अब तो बस उनके लहूलुहान ,कसमसाते ,चूरे बचे है ,

मैने ढेर लगा कर रखे है , मेरी यादो के आँगन में ,

 

 

कभी आ जाना फुरसत में , अपने अपने ख्वाब छाट लेंगे ,

तुम अपने ख्वाब छाट  लेना , मैं अपने ख्वाब छाट  लूंगा,

 

 

और अपने साँजे ख्वाबो की होली जला देंगे,

की कही कोई गुंजाइश , न बचे ,

ख्वाबो के पनपने और लहलहाने की |

 

 

© Abhishek Yadav 2017

Image Source – www.google.co.in

मैं तो सागर हुँ

हर अनछुई लहर जो तुम तक नहीं पहुंच पाती है |

मुझे वो बतलाती है |

 

अभी और जरुरत है ,वेग की , तपन की, तड़पन की ,

अभी और ताज़गी देनी होगी , अरमानों को ,

अभी और उमंगें चाहिए ,प्रयासों में,

चपलता साहस में,

और विस्वाश  अपने प्रेम में |

 

पर मैं नहीं हरता, मैं नहीं थकता , और मैं नहीं रुकता ,

मैं भेजता हुँ, फिर भी , और भी ,

उन्नत , अपरिमित , अपराजित  लहरें,

और वेग,और विस्वाश ,

और उम्मीदों  के साथ ,

तुम्हे चूमने , तुम्हे अपनी आगोश में भरने ,

अपने आप में मिलाने ,

और ले  चलने  के लिए , अंतहीन प्रवास में |

 

और में ये करता रहुंगा, जब तक,

तुम मुक्त न हो जाओ ,

अपनी बनायीं सीमाओं से , अपनी ज़मी  से,

अपनी आत्म संघर्ष से , अपने आप से ,

मैं तो ये करता रहूँगा , मेरा तो ये काम है

क्योकि मैं तो सागर हुँ |

 

© Abhishek Yadav 2016

Image source – www.google.co.in

मेरा धर्म

image

समय के समंदर में ,कुछ पलो के लिए रुक भी जाओ ,

थक चुका मैं, अपनी  नाव खेते,

कुछ सांसो के लिए रुक भी जाओ |

 

सांसे अब उखड गयी , जीवन-नाव खेते ,

किनारा फलक के पार अदृश , दृस्तिविहिन ,

मेरी छमता, मेरी सीमा के पार ,

ऐसे में अब इतना भी मत उकसाओ |

कुछ ऋतुएं भर न सही , पर कुछ पलो के लिए ही ,

मुझे मेरे पास रख जाओ |

 

मुस्कुराई और बोली –

कुछ छड़ो के लिए भी रुक गए तुम ,

तो यही जड़वत हो जाओगे,

भावनाओ ,  अकॉक्षाऔ का बवंडर है ,

स्वप्नों की आँधी है,

उम्मीदों को ओले  है ,

और सम्बन्धो की व्यधि है |

 

रुक गए , तो जकड जाओगे,

पत्थर बनकर धस जाओगे ,

थम गए तो ज्वाला मर जाएगी आत्मा की ,

और, ऊष्मा आलोक हो जाएगी दिवास्वप्नों  की |

 

तुम केवट हो , तुम्हे नाव चलाये रखनी है ,

अपने कर्तव्यों से,

अपने कर्मो से ,

रुकना तुम्हारा धर्म नहीं है |

 

 

और मैं लौट आया ,अपने कर्तव्यों की दुनिया में ,

मेरा धर्म निभाने |

© Abhishek Yadav 2016

Image Source – www.google.co.in

एक टुकड़ा आसमान का

267675

अरमानो को गुबार ठुसे पड़े है, रूह में ,

कुलबुलाते , बुलबुलते ,लबरेज , छलछलाते,

बड़े अरमानो से सींचे ,

कही दफ़न न हो जाये , मेरे साथ मेरी कब्र में |

हो सके तो एक टुकड़ा मुझे दे देना आसमान का ,

छोटे सुर्ख बादलों वाला ,

आरज़ू-ए-ज़िन्दगी समझ कर मेरे खुदा |

हो सके मेरे अरमानो की स्याही ,

गुलाल बन बरसे किसी और की ज़िन्दगी पर |

1082113305

© Abhishek Yadav 2016

Image Source – www.google.co.in