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वापसी

बड़े दिनों सो कुछ मित्रो ने किखा की मैं क्यों आज कल कुछ लिख नहीं रहा हूँ, कहा व्यस्त हूँ ,
बस सब मित्रो को धन्यवाद, और उनसब के लिए लिख रहा हूँ ।

कुछ वक्त की मज़बूरी थी , और कुछ मै बेबस था,
लिखना मेरा शौक ,नहीं, मज़बूरी भी है ,
बस ,कुछ मजबूर था , जिंदगी की आपा धापी में ,
और बदहवासी में, अब वापस आया हूँ
ये जान कर , की मैं कौन हूँ !!

बाकि सब कुशल मंगल है, अब फिर से बातें होगी

 

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I am back, i am alive

Some many for of my friends and reader were saying that, why I am not active and composing something, this is for those my good wishers.

I was cocooned, but not frozen,

I was busy, yet awaken,

I was involved in business but not broken,

Yes, I am back, not just for you, but this time for me,

for myself, because writing is not my hobby

but the expression of me to myself.

yes I am still alive

Yes, dear, I am back and this time more mature and expression, sorry for occupancy in materialistic and practical life.

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JNU-भारत नवचेतना की सुरुवात

मुझे पता नहीं की वो कौन लोग थे जिन्होंने JNU में भारत विरोधी नारे लगाये , और अभिव्यक्ति की आज़ादी के आधार पर अपने कुकर्मो की लीपा पोती कर रहे है, किसी भी व्यक्ति और किसी भी राष्ट्र के लिए आत्म सम्मान बड़ा कुछ भी नहीं होता , और कुछ भी नहीं हो सकता ; किसी भी वयक्ति, संस्था,दल,समूह की अभिव्यक्ति , राष्ट्र सम्मान से बड़ी नहीं हो सकती |

और जिन व्यक्तियों को भारत में अभिवयक्ति की स्वतंत्र नहीं महसूस होती , मुझे उन लोगो पर तरस आता है की वो लोग चीन, उत्तरी कोरिया , और UAE  जैसे देश में नहीं है , ये उनका सौभाग्य है की, उनको भारत में उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रत नहीं है , ये कहने और सोचने की भी स्वतंत्र है ,

नहीं तो जो प्रकरण JNU में हुआ , वो अगर चीन में होता तो Tiannmen  Square  जैसी घटना दुबारा होती और कोई चु तक नहीं करता , ये हमारे समाज , और हमारे कानून की नपुंसकता है की हम लोगो को अपने दुस्मनो को सहने की आदत हो गयी है |

अब समय बदल रहा है , और सामाजिक चेतना के इस दौर में हम , विभीषड़  और जय चन्द्रो, को  नहीं सहेगे , बहुत हो गयी लीपापोती , बहुत हुई राजनीति , और बहुत हुई उदार राष्ट्र की छवि , कुछ चीजो के साथ , और कुछ चीजो के लिए हम लोगो को असहिष्णु बनना पड़ेगा ,

और शुरुवात हम लोगो को आज ही करनी होगी , JNU बदलते भारतवर्ष के पदार्पण का गवाह  बनाना चाहिए ,हर उस वयक्ति जिसने भारतवर्ष के खिलाफ  नारे लगाये , हर उस व्यक्ति जिसने पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाये, हर उस वयक्ति जिसने अफज़ल की शहीद कहा , हर उस व्यक्ति  जिसने इस विचारधारा की सम्मानित और सहयोग किया , उस व्यक्तियों को सरे आम फांसी होनी चाहिए ,सिंगापूर , दुबई ,अमेरिका , फ्रांस और रूस जैसे सम्मानित देशो  की तरह , जिस तरह ये राष्ट्र अपने देश के दुश्मनो , और देशद्रोहियो से निपटते है , हमें भी इनके कर्मो से सीख लेनी चाहिए , और ये वो ही देश है जिनकी कानून ववस्था से हम अपने देश से तुलना करते है |

देश को बाहरी दुश्मनो से बचाने में खून बहता है, जाने जाती है  और अगर देश को आंतरिक दुश्मनो से बचाने में भी खून बहता है है तो बहे ,पर राष्ट्र सम्मान से बड़ा न कुछ है और न कुछ हो सकता है,

भारत के बाहरी और आंतरिक दुश्मनो  सावधान , अब हम बदल चुके है, और हमारा देश भी बदल चूका है |

https://youtu.be/BW6_mT7in1Q

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मेरी ज़रूरतें

दो वक़्त की रोटी ,कुछ जोड़ी कपडे , और सर पर एक छत,

यही तो ज़रूरत होती है ,

मुझ  जैसे इंसान की !

ये जरूरतें तो  मेरा शहर भी कर सकता था ,

ये जरूरतें तो मेरा अपना गाँव भी पूरा कर सकता था .

 

तो फिर क्यों जरुरत पड़ी मुझ  जैसे को ,

इंसानी समंदर में डुबकी लगाने की ,

इस सैलाब के साथ बहते जाने की ,

जिसका का कोई आदि है न अंत

न कोई ओर न छोर  |

 

क्या सिर्फ ये ही मेरी जरूरते है ..?

या फिर मै नहीं ईमानदार खुद से ,

या फिर मुझे इल्म ही नहीं अपनी ज़रूरतों की  ..?

 

शायद मुझ  जैसे और भी न जाने कितने होगे ,

दूसरी जमी पर, अपनी खुद ज़मी से जुदा,

तलाश करते अपने ज़मी, ज़रूरतों और ज़ज़्बातो की  |

 

ये दोस्त मेरे अगर पता चल जाये की माज़रा क्या है .?

की मुझ जैसो को अपने जरुरतो नहीं पता..?

या मुझ जैसो को जरुरत आन पड़ी और ज़रूरतों की ..!

 

बता देना , मुझे याद से ,

मुझ जैसे जरूरतमंद को जरुरत है ,

अपनी ज़रूरतें जानने की  |

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कलाम तुझे सलाम

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सपने सिर्फ सपने नहीं होते ,

सपने सिर्फ सपनो के लिए नहीं होते,

सपनो से पहचान होती है,

सपने ही जीवन का ज्ञान होती है |

 

सपने देखना , सपने दिखलाना ,

और; सपनो को पूरा करने का अभिमान सिखलाना ,

अपने सपनो के लिए मर मिटना ,

सपनो के लिए ही ज़िंदा हो जाना |

 

सपनो से ही सपने बुनना ,

अपने सपनो से ही, दुसरो को सपने दिखलाना ,

और अंत में सपने दे कर,

खुद सपना बन जाना  |

 

तुमने मुझे है , ये सब सिखलाया ,

तुमने मुझे , ये सब बतलाया ,

तुमने मुझे ,करना, मरना,मिटना, और फिर जी जाना बतलाया |

 

लविदा , मुझे सपने दिखलाने वाले ,

अलविदा , मुझे सपनो में जीना सिखलाने वाले ,

अलविदा,  सपना बन जाने वाले,

अलविदा कलाम,

कलाम तुझे सलाम !!

 

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© Abhishek Yadav 2015

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Language of Love

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I smile when you use jargon of adorable words,

Friend, close friend, companion, partners of life, everlasting relation,

Love, attraction, infatuation, feelings, emotions, platonic, passion , crazy,

I wish I could understand demarcation between these words,

Mumbling, jumbling, confusing, inarticulate and irritating,

 

I could acknowledge you one thing, which is pouring direct from my heart and soul.

I am an illiterate; I do not understand segregation and differentiation between love words,

I do not understand dimension and different degree of love,

I could not separate intensity and depth of feeling,

I cannot see discrepancy in intention and magnitude of relationships,

 

These vocabularies of those people, who have rainbow of feelings,

My feeling for you just monochromatic,

When you chat with me, time gets slow,

When you talk with me, I could feel breeze,

When you touches me, I could I feel sound of wind,

Warmness of you breaths feels for me like music to heart,

When you are not around me, still I could feel you,

I love to watch you, every second,

I want to hear you forever,

I want to be with you till infinite,

 

I do not know how you are going to judge my feelings,

I do not know where my sentiments going to be fit in you grades,

I do not know what category you are going to give my emotions,

I do not know  in which class you are going to put my love,

I do not really care all these things,

 

For me significant is,

What I can do for my lady,

How better I could take care of you,

And, how could I feel you special.

My love, I know only this language of love,

Hope you could understand my feelings for you.

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© Abhishek Yadav 2015

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Pole star

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On heap of rocks I was sitting,

All alone, offended, dejected, tired, disheartened and twinged,

Nowhere to go, no direction, not desired, no passion,

I lost my recollections,

who am I,

From where I came from

Where I have to go.

All grief, pain and just full with darkness in and out,

Breeze was arctic; no warmness was in fire, just all my world was broke up.

 

Only thing that I could remember was I am and pole star,

All abandoned nothing far and behind me, what to do and where to start do not know,

In freezing storm I sensed a fluid voice, silky, smooth, tender and warm,

Came in my ears and going into my soul,

Was chanting like a baby, whispering, uttering unclear but comforting to heart,

 

 

She was in front of me, smiling, In white gown, came to me,

Touches me and said to me.

My love forgot what happened with you,

 Where you have to go,

Just trust yourself,

Just believe In you,

All these pain, agony, frustration, sorrow are quick.

Just keep walking; you are not made to be   remorse, to lament on death of yours.

Nothing you lost nothing you could revive.

I am with you forever and always.

 

I asked who you are, do I know you, why you are supporting.

She smiled and said I am you forgotten love,

Your own soul,

Your own body,

I am you own pole star.

 

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© Abhishek Yadav 2015

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All around you……

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Distance between you us spacious,

You can’t feel me and I am also not in front of you,

Shadow of my emotions can be mingle with you,

Even salty tears of your grieve, can’t moist me,

Waves of your smile, can’t touch my stoned heart

 

You are in impair,

You are in rejoice,

You are in dilemma,

You are under evils,

You are deserted,

You are tired

You are annoyed

I do not know how you are feeling now and then.

 

But I could remember you are a brave girl, a warrior spirit,

Show no tears,

Show no pain,

Show no emotions,

I know you are a fighter,

You are a survivor,

You are with conviction,

You are with zeal,

 

My dear I am thousands of miles away from you, not with you in struggle of life,

I could not be stand shoulder by shoulder with you every day ,

But it does not means that I am not with you.

 

In daily resist of existence when you are worn out and going to be broken down,

 Just close your eyes,

 

You could feel breeze on your head from my blessing,

You could feel warm around you from my hug

You could feel moist on your eyes from my kisses

You could feel me yourself on my shoulder

I am with you, all around you

Just you could see me by your inner eyes.

My lady just feel me.

I am all around you.

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© Abhishek Yadav 2015

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