Hindi

पनोती

कुछ तो बात होगी तुम में ,
हज़ारो शमा के बीच में रहकर भी ,
तुम्हारी रौशनी की यादें, आज भी चटकती है,
सुनहरी रेत आज भी , आँखों के कतरे से बहती है ,
पर चुभती नहीं है ।

 

 

खास तो है तुम में ,की मेरे यादो के भवर के ,
बीचो बीच में तुम हो ,
यु ही इश्क़बाज़ी, का समंदर आ कर तुम पर सूख गया |

 

 

ऐसी ही बाते , बहुत सी, बतलानी, समझनी थी तुम को,
पर तुम तो जानती हो ,
निगाहे मेरी ठहरी पनोती,
लग गयी मुझको ,
जिस रोज तुम्हे आँखो में बिठा के आईना देखा था ।

 

 

अब क्या कहुँ, जाते जाते ;
जरा अपनी यादों के कसक की दवा बताती जाना ,
बड़ी टीस मचती है अकेलेपन में ।

 

© Abhishek Yadav- 2018

www.google.co.in

 

Advertisements

I am waiting for your feedback -

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s