Hindi

कालजयी अटल

कालचक्र की अनंत परिधि में सब कोई पीस जाता है ।,
जो काल के कपाल पर अमरबेल बन कर बैठा वो अटल है ।

जो दृष्टि प्रारगम्य हुआ वो तो नश्वर शरीर है,
जो कुछ बचा तुम्हारे मेरे अंत पटल पर वो अटल है ।

स्तब्ध तो मैं भी हु, निशब्द तो मैं भी हूँ, पर जीवन तो चलायमान है,
जीवन धारा में सब गतिशील है , पर अब जो नहीं है वो अटल है ।

कोटि कोटि प्रणाम, दंडवत विदाई ,

©Abhishek Yadav-2018

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