Hindi

वन्दनीये

जब जरुरत होती है, होती हो तुम कही ,

जब जरुरत नहीं भी होती है , तो तुम ही होती हो ;

न जाने कितने रूपों , कितने व्यक्तित्व्यों , कितने सम्बन्धो में;

कब से, कहाँ से, मेरे साथ बनी हो।

 

 

जीवन  न तुम्हारे बिन सुरु हो सकता है ,

न ज़िंदगी तुम बिन चल सकती है ;

तुम्हारे होने पर लगता है खुद का पूरा होना ,

तुम्हारे बगैर ,कुछ कमी सी खटकती है ।

 

 

पुरुष हो कर न कमजोर होना मेरी तो मज़बूरी है ,

और मुझे मजबूत होने देना तुम्हारा बड्डपन है ;

मेरा खुद को फौलाद दिखाना तो  छलावा है ,

क्यों  की तुम ने हमेशा खुदको कमज़ोर दिखाया है ।

 

 

 

मैं मज़बूत हूँ, तो तुम से हूँ ,

मैं कमज़ोर हूँ तो तुम से हूँ ,

मेरा कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं ,

मेरा अस्तित्व पाने के लिए भी , तुम्हारा अस्तित्वे जरुरी है ।

 

 

भावनायें तो असीमित , अपरिमित , अतुलित है ;

बस तुम्हारे लिए  एक शब्द…

नारी तुम वन्दनीये हो ।

 

मेरी माँ , मेरी बहन और उन सारी महिलाओं को सो समर्पित जिन्हे मैं जानता और नहीं जानता हूँ ।

© Abhishek Yadav 2018

Image source – www.google.co.in

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