Hindi

मैं तुम्हारे साथ हूँ

आगे चलो ,
क्यों की , पीछे सिर्फ इतिहास बैठा है ,
कुछ लोग, कुछ बाते,कुछ कड़वी, कुछ मीठी यादें,
ये सब बीते वक़्त की यादें है ,जो दब रही है वक़्त के गर्त में |

 

छोड़ दो, इन गर्दो को, उड़ जाने दो ,
मलबे से गुम्बदे तामील नहीं होती ,
टूटे आईने में शकले नहीं दिखती ,
फूटे प्याले की दरारें, कभी नहीं भरती ,
इन बीते यादों, से बच जाता है तो सिर्फ ,
मायूस,बेबस , जिरह खारदार यादों की ,

 

 

आओ आगे, मेरे साथ , फिर से मिल कर ,
ताना-बाना,बुनेगें आने वाले वक़्त का ,
खाका खीचेंगे उजले मुस्तकबिल का ,
तुम एक कदम भरो तो सही ,
मैं तुम्हारे साथ हूँ |

 

तामील- अमल, जिरह- पूछताछ , खारदार- काँटेदार, मुस्तकबिल- भविष्यकाल

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Hindi

धुंधले साये

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कोहरे की घनी दिवार के पीछे के ; धुँदले साये ,
कभी आना मेरे पास ,बड़ी शिद्दत से इंतज़ार है ,
तुम्हारे दीदार का |

 

बेपनाह बेबसी है ,तुम्हारे दीदार की ,
कुर्बान की है नींदे,रंगीन सपने देख कर न जाने कितनी रातें की ,
गुलाबी रेत पर अनगिनतों खाका खींचा ; तुम्हारी शक्ल की  |

 

आ जाओ मेरे पास ,बिन झिझक, बिन हिचक के ,
अपने कदमो को आज़ाद कर के,
मेरे पास बिन देर किये |

 

 

या फिर अशआर बता दो मुझे ,
मेरे धुंधले ख्वाबो के पार जाकर,
तुम्हे आगोश में भरने का |

 

© Abhishek Yadav-2017

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शिद्दत – प्रबलता,  दीदार- साक्षात्कार,  अशआर-रहस्य

Hindi

मैं चलता हूँ….

आज फिर ख़ुद को बेबस  महसूस करता हूँ,
कल भी कुछ नहीं था ,आज भी कुछ नहीं है ,
फिर भी कारवाँ लूटने से डरता हूँ |

 

मेरी तन्हाई मुझे सोने नहीं देती ,ख्वाबो की गर्माहट ;मुझे रोने नहीं देती ,
काश , मैं भी अपनी बेबसी का ठीकरा दूसरो  के सरो पर फोड़ पाता,
अपनी शिकस्त  को बदनसीबी ठहराह पाता,
पर अफ़सोस है |

 

अपना कारवाँ,  खुद मैंने ही पाया है ,
कुछ छूट,कोई रूठा ,कुछ पाया, कुछ को मनाया ,
किसी का प्यार, किसी की ठुकराई , खुद उलझा, खुद सुलझाया है |

 

अब क्या करू , रुक पाने की मेरी सोहबत नहीं ,
अब तो आदत सी पड़ गयी है , फकीरी में सिकंदर बन मुस्कुराने की ,
चलो चलता  हूँ, बहुत अरमान है चुमकारने को ,
बहुत से बुर्ज बाकि है नाप आने को |

 

© Abhishek Yadav -2017

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सोहबत- संगत,  अरमान- इच्छा, चुमकारने-चूमना, बुर्ज- गुंबद

 

Hindi

हमारे ख्वाब

ख्वाब जो कुछ हम  ने देखे थे ,

तुम्हारे  लिए , मेरे लिए , और हमारे लिए ,

 

 

अब तो बस उनके लहूलुहान ,कसमसाते ,चूरे बचे है ,

मैने ढेर लगा कर रखे है , मेरी यादो के आँगन में ,

 

 

कभी आ जाना फुरसत में , अपने अपने ख्वाब छाट लेंगे ,

तुम अपने ख्वाब छाट  लेना , मैं अपने ख्वाब छाट  लूंगा,

 

 

और अपने साँजे ख्वाबो की होली जला देंगे,

की कही कोई गुंजाइश , न बचे ,

ख्वाबो के पनपने और लहलहाने की |

 

 

© Abhishek Yadav 2017

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ख्याल

लोगो के मरने से अगर सपने भी मर जाते ,
तो, किसी के ख्वाब न पल रहे होते मेरी रूह में ,
वह ज़िन्दगी , तुम भी क्या क्या
फलसफे  झुठलाती हो |

Hindi

ख्याल

तुम्हारी ,किसकती सिसकियो को,
ला दबा रखा है, अब अपने सिरहाने के तले,
की शायद, एक दिन अपनी आरजू की नमी से धोकर ,
लौट सकु कुछ असली सपने,
जो तुम्हारा हो न सका ,
और मैं, जो तुम को दे न सका |

Poetry

My Enigma

Far from me, on the end of this world.

On unknown location, where not imaginations could reach,

Lucid  land, different from my imagination,

Uncertain Coordinates, someone is there.

 

 

On each dawn, when  misty winds comes from east,

Carrying, vivid radiation, and vibes of a strange joy,

Puzzling fragrance all around me,

Holding, a dissolved aura, which only I can scenes.

 

 

These are beacons  there is someone, somewhere

Totally unknown, uncertain to me

Someone memorable, someone is known to me,

But there is someone, for me

 

 

My enigma, you there,

I will find you,

I am tracking your tracks,

I am coming.

 

 

 

© Abhishek Yadav 2017

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