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ख्याल

​खुद से भीड़ का हिस्सा बन ज़िन्दगी बसर कर ली,

आज दूसरे ने लाइन लगवाई तो बिलबिला उठे।

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ख्याल

​पेट भर कर आखरी बार कब खाया, याद भर नहीं,

कोई पूछने वाला ही नहीं बचा, की और कुछ लोगे क्या?

#माँ

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बेबसी

           1

​बहुतो की फितरत आज है ,मुझ सी।

देखने को सबकुछ है,पर खरीदने को कुछ भी नहीं।

        2

आज नाज़ है अपनी गरीबी पर,

कम ही पैसे है, पर नींद पूरी है।

      3

कुछ सकून है, बहुतो को खुद सा बेबस देख कर,

क्या हालत होती है, जब अरमान भरे हो, और बटुए खाली

#कालाधन,9 Sep 2016

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ख्याल

​क्या बेबसी है मेरी, सारा जहान सुन सकता है मुझे,

सिवा तेरे।

जिसके लिए बया ये दास्ताँ है।

गर महसूस हवा में नमी सी हो, तो समझना 

कोई कही परेसा, सा है।

लफ्जो की खाई है दोनों के बीच,

पर ये ना समझना ,ये दरिया जमा सा है।

मुझ सुखी चट्टान पर मत जाना,

इनके नीचे लावा आज बहा सा है।

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ख्याल

​रोटी की ज़द्दो-जहद में, हाथ तंग पड़ गए है मेरे,

वरना आज भी दिखा देतां मैं, सीना चीर कर।

दिल वही है मेरा, बस धड़कना कम सा कर दिया है।