Hindi

मैं तो सागर हुँ

हर अनछुई लहर जो तुम तक नहीं पहुंच पाती है |

मुझे वो बतलाती है |

 

अभी और जरुरत है ,वेग की , तपन की, तड़पन की ,

अभी और ताज़गी देनी होगी , अरमानों को ,

अभी और उमंगें चाहिए ,प्रयासों में,

चपलता साहस में,

और विस्वाश  अपने प्रेम में |

 

पर मैं नहीं हरता, मैं नहीं थकता , और मैं नहीं रुकता ,

मैं भेजता हुँ, फिर भी , और भी ,

उन्नत , अपरिमित , अपराजित  लहरें,

और वेग,और विस्वाश ,

और उम्मीदों  के साथ ,

तुम्हे चूमने , तुम्हे अपनी आगोश में भरने ,

अपने आप में मिलाने ,

और ले  चलने  के लिए , अंतहीन प्रवास में |

 

और में ये करता रहुंगा, जब तक,

तुम मुक्त न हो जाओ ,

अपनी बनायीं सीमाओं से , अपनी ज़मी  से,

अपनी आत्म संघर्ष से , अपने आप से ,

मैं तो ये करता रहूँगा , मेरा तो ये काम है

क्योकि मैं तो सागर हुँ |

 

© Abhishek Yadav 2016

Image source – www.google.co.in

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