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मैं चला, मैं चला

Imagenes Tristes 65


मैं चला , मैं चला

कभी इधर कभी उधर , न जाने किधर किधर ,

हुँ मैं मनमौजी , करता नहीं किसी की फिकर ,

मैं दुनिया से बेखबर, बस रहता इधर उधर ,

मैं चला, मैं चला |


न जाने क्यों है जाना , क्यों मैं हुँ मनमाना,

न किसी से पूछना , न किसी की बताना ,

बस गाना अपनी धुन अपना तराना ,

मैं चला मैं चला  |


सच कहुँ होती है मुझे भी फिकर ;लगता है डर,

अनदेखे का डर , कुछ न होने का डर, कुछ न कर पाने का डर ,

कुछ न दे पाने का डर ,

इन डरो से रहता हुँ घिरा, हर वक़्त मै, हर फिकरा,

जो भी करो , तो भी कुछ न कुछ कहेगा  जमाना ,

दुनियावाले ,अपने सारे,दोस्त यार , सब कभी कर देंगे बेईमाना,

मैं चला मैं चला  |



न रहेगा आखरी वक़्त में मेरे सिवा, कोई सुनने वाला,

न कोई होगा सुनाने वाला , अपने दिल का तराना,

तभी तो मैं चला ,

और , मैं ही चला   |




© Abhishek Yadav 2015



I am a free spirit. I am living human because I not only see this entire world but also react, the response on impulses after my own observation and analysis. I write because, I see and all thing which is around me and I reacts on those small and big impulses, desires, ideas, and motivations. there are many stories, many ideas, many thoughts are in my mind, which I share via my blog My philosophy is to share what is I see, what I feel, what I imagine, what I react with people all around me, somewhere out, freelining somewhere far from me, rather than keeping within me.

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