Poetry

I Am Waiting…

I am not a prince, nor charming,

Not even having a horse, or to offer you a unicorn,

I am a simple man,

I carving that, I could offer you all these luxuries, lavishness,  leisure of this world,

Fulfill all your dreams, all desires and aspirations of yours.

 

 

Darling; for me life is not a bed of roses, it is like rollercoaster,

Bitter and sweet, fire and ice, day and dawn,

Nothing is confined, fasten and robust for me,

I am struggling for me, for my continuation; and for my future.

 

 

But something is sure that for which I could tell you right now,

I can offer you my words,

I can offer you my cuddle,

I can offer you my rejoice,

I can offer you my soul,

I can offer you, is  me.

 

 

Sorrow, ache, misery, nuisance, agony, lament, cry and words like these would be history,

Darkness would be something like mystery,

But

You have to act something.

 

 

I need your trust, I need your faith, I need your commitment, I need hope, I need your dreams,

Then you can see, love

How beautiful we can make this world,

Not only for you, not only for us but for everyone who is surrounded to us,

 

 

Please give up all your hesitations, your cocoon,

Your mental barriers, your hurdle,

My heart is filled with emotions, eyes are about to splash,

 Beats are fast, time is rushing

and

I am here waiting for you, my soul.

© Abhishek Yadav -2015

Image Source – www.google.co.in

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Hindi

भावना नियंत्रण

 

समय की रेखा के उस पार , क्या रखा है ..?

क्या पता ..?

क्यों फिक्र..?

मैं नही जानता  , न तो जानने की ख्वाहिश है |

फिर भी नजाने क्यों ये हृदय विचलित  है ,

उन असम्भावी कथको, मिथको  और;

अघोषित भविष्यवाड़ीयो की सन्तुति और सत्यापन को ले कर ,

क्यों ;पता नहीं ,

मैं नहीं जानता |

 

विचलित होने का कारण नहीं जानता ,

फिर भी ह्रदय विचलित है ,

शायद तभी कहते है |

भावनाओं पर किसी का जोर नहीं चलता ,

शायद खुद का भी नहीं |

 

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© Abhishek Yadav 2015

Hindi

मैं चला, मैं चला

Imagenes Tristes 65

 

मैं चला , मैं चला

कभी इधर कभी उधर , न जाने किधर किधर ,

हुँ मैं मनमौजी , करता नहीं किसी की फिकर ,

मैं दुनिया से बेखबर, बस रहता इधर उधर ,

मैं चला, मैं चला |

 

न जाने क्यों है जाना , क्यों मैं हुँ मनमाना,

न किसी से पूछना , न किसी की बताना ,

बस गाना अपनी धुन अपना तराना ,

मैं चला मैं चला  |

 

सच कहुँ होती है मुझे भी फिकर ;लगता है डर,

अनदेखे का डर , कुछ न होने का डर, कुछ न कर पाने का डर ,

कुछ न दे पाने का डर ,

इन डरो से रहता हुँ घिरा, हर वक़्त मै, हर फिकरा,

जो भी करो , तो भी कुछ न कुछ कहेगा  जमाना ,

दुनियावाले ,अपने सारे,दोस्त यार , सब कभी कर देंगे बेईमाना,

मैं चला मैं चला  |

 

 

न रहेगा आखरी वक़्त में मेरे सिवा, कोई सुनने वाला,

न कोई होगा सुनाने वाला , अपने दिल का तराना,

तभी तो मैं चला ,

और , मैं ही चला   |

 

 

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© Abhishek Yadav 2015