Hindi

आज की रात

आज रात जब चांदनी अपनी रौशनी फैलाएगी,

जब तारो की लड़िया बलखाएगी,

जब हवा बहार बन जाएगी,

जब रात की रौशनी और स्याह हो जाएगी,

जब आकाश की टिम-टिम  अपना  गीत गुनगुनायेगी,

जब महक, अँधेरे की वक़्त पर फैल जाएगी |

 

जब तुम अपने सिरहाने मखमल की पंखुड़िया लगाओगी,

जब तुम बर्फ सी  ठंडी चादरें बिछाओगी,

जब तुम सपनो की चासनी में आओगी  ,

जब तुम  अपने आप को  वक्त के आगोश में देने, जाओगी |

 

lucid-dreaming

बस उसी वक्त , अपनी खिड़कियाँ खुली रखना , आज की रात ,

 मैं  आऊंगा , होकर अँधेरे के अश्व पर सवार ,

महसूस करने  वक्त की सुंदरता ,

तुम्हारी  चाँद से सादगी ,

तारो सा ठंडापन ,

महसूस करने वो रेशमी  साँसे,

देखने कंचन आभा ,

सुनने प्राण-वायु का संगीत ,

छु लेने अनुपम आभा |

 

बस मैं आऊंगा जब तुम सपनो में होगी ,

और मैं वापस चला जाऊंगा ,

जब तुम मेरे सपने में होगी,

पर मैं आऊंगा , आज की रात |

 

 

 

© Abhishek Yadav 2015

Image Source- www.google.co.in

One thought on “आज की रात

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