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मैं आऊंगा…

मैं आऊंगा……

खुद को तुम अकेला क्यों समझती

मै तो हूँ, हर जगह तुम्हारे साथ |

तुम्हारे सुबह की लाली में,

तुम्हारी सुर्ख रात की स्याह काली में |

बहता हूँ मै तुम्हारी सांसो के साथ ,

मैं ही तो करता हूँ तुम्हारी बातो से बात |

तुम्हारी मुस्कराहट के साथ मैं भी खिलता हूँ ,

और तुम्हारे आँसुओ के नमक से भी मिलता हूँ |

चलता हूँ तुम्हारे साथ बनकर बादलों का ढ़ेर,

चाँद बन कर देखता हूँ , जब तुम आती हो रात को देर |

तुम्हारे तकिये पे  बैठ, अपनी गोद ने, मैं तुम को सुलाता हूँ ,

जब थक जाती हो तो, सपनों में आकर  लोरी सुनाता हूँ |


मैं था , मैं हूँ , तुम्हारे लिए  बस अब न खुद को बेक़रार करो,

बस आ रहा हूँ तुम से मिलने , कुछ और इंतज़ार करो |

हम मिल जायेगे  और मिल कर  एक शून्य बनायेगे ,

तुम मुझसी हो जाना , मैं तुम सा हो जाऊंगा , और हम समपूरक  हो जायेगे |

तब तक करो इंतज़ार , विस्वास रखो मैं आऊंगा ,

मैं आऊंगा |


© Abhishek Yadav 2015

Image Source –



I am a free spirit. I am living human because I not only see this entire world but also react, the response on impulses after my own observation and analysis. I write because, I see and all thing which is around me and I reacts on those small and big impulses, desires, ideas, and motivations. there are many stories, many ideas, many thoughts are in my mind, which I share via my blog My philosophy is to share what is I see, what I feel, what I imagine, what I react with people all around me, somewhere out, freelining somewhere far from me, rather than keeping within me.

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