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मेरी ज़िन्दगी हो

मेरी ज़िन्दगी हो....
मेरी ज़िन्दगी हो….

जब जब तुम्हारे गेसुओं में आता हुँ,

हर बार तुम को ज़िन्दगी कुछ नया नया सा पता हुँ ,

तुम्हारी स्याह आँखों से जितना नज़रे मिलता हुँ ,

हर बार तुम्हारी साँवले जाल में फसता जाता हुँ ,

तुम्हारी बातो को जितना सुनता जाता हुँ,

हर बार खुद को उलझा पाता हुँ ,

ज़िन्दगी मैं क्या बताऊ , मैं तुम को कितना चाहता हुँ  |

 

 तुम होगी अलग मेरी कविता, कल्पना , कथन, कामना , कर्म के पार ,

या शायद तुम होगी अबूझ , अगम, अदभुद, अकल्पित ,मेरी आकांछाओ  से करती  तकरार ,

नहीं तो होगी नीरस ,निर्जीव , नीड़, नमित, करती  नज़रो से  तकरार ,

तुम कैसी भी हो , चाहे जैसे भी हो , मुझे है तुम से है प्यार ,

आखिर हो भी क्यों न , तुम मेरी ही तो हो ज़िन्दगी ,

तुम मेरी ज़िन्दगी हो  ||

 

 

 © Abhishek Yadav 2015

                                                 image source – www. google.co.in

 

2 thoughts on “मेरी ज़िन्दगी हो

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