Posted in Hindi

मेरी माँ अलग थी

मेरी माँ अलग थी....
मेरी माँ अलग थी….

मेरी माँ अलग थी, मुझे कुछ और ही बातें बतलाती थी,

की न कोई राजा, न रानी ,न शैतान, न परियो के किस्से सुनती थी,

ज़िन्दगी आसान नहीं है ,रास्ते खुद नहीं बनते ,

मंजिले तराशनी है , आँसुओ की कीमत नहीं,

सच की कोई हार नहीं , और न जाने क्या क्या सुनती थी  |

 

मेरी माँ बड़ी अजीब थी , अजीब अजीब सी चीज़े सिखलाती  थी,

मुझसे काम कराती , खुद काम करना सिखलाती ,गलतियों पर डांट देना,

शिकायत आने पर मार देना, अलग अलग किस्से बुनती और हम लोगो को बतलाती थी  |

 

लगता था क्या माये, ऐसी होती है .? क्या ऐसी चीजे बतलाती है ..?

आँख खोल सोना, न किसी के सामने रोना ,

मुस्कुरा कर अपनी रोटी खाना ,दुसरो की दाल देख न ललचाना,

अपनों के लिए झुक जाना , सम्मान के लिए लड़ जाना ,

इज़्ज़त के लिए मार जाना , बुरे समय से न घबराना ,

और न जाने क्या उल्टा सीधा सिखलाती थी ,

शायद मेरी माँ कठोर ,निष्ठुर ,बाबली थी,की ये सब बतलाती थी  |

 

समय बिता ,साल बीते , और अपने ,और अपनों के हाल बीते ,

ज़िन्दगी में न राजा , न रानी देखि ,न कोई बुढ़िया सायानी देखी

देखी दुनिया देखी और दुनिया की चाल ,

अपनों के बीच न अपना देखा , न मिला बिन काम पूछने वाला हाल  |

 

ज़िन्दगी थी वैसी जैसी मेरी माँ मुझे बतलाती थी ,

हाँ भाई दुनिया तो वैसी निकली जैसी मेरी अबूझ माँ मुझे समझती थी,

शायद उसे शौक नहीं था , ख्वाब दिखाने का,और ख्वाबो के तोड़े जाने का ,

इसीलिए कड़वे सच बतलाती थी ,

मेरे कोमल बचपन को, अपने अनुभव ,इरादो, और इल्म से पकती थी  |

 

वो पागल नहीं, सनकी नहीं , अजीब भी नहीं थी ,

वो बनी मेरे जीवन का कुम्हार , मेरी सोच का आधार ,

मेरे विचारो का आकार, मेरे वक्तित्व का चमत्कार ,

मेरी माँ अलग थी, अलग बना गयी मुझे ,और करा गयी आत्मसार ,

अब क्या बचा करने को सिवाए नमस्कार  |

 

 

मै फिर भी कर रहा हु इंतज़ार , तुम फिर से आओ ,

और फिर से गोद में लेकर ,सीने से लगाओ,

और अगले जन्म ,और उसके भी अगले जन्म अपना पुत्र बनाओ ,

और हर बार मुझे दुनिया से अलग और अलग बनाओ,

माँ तुम सच में अलग हो  ||

 

 © Abhishek Yadav 2015

images source – www.google.co.in

Advertisements

Author:

I am a free spirit. I am living human because I not only see this entire world but also react, the response on impulses after my own observation and analysis. I write because, I see and all thing which is around me and I reacts on those small and big impulses, desires, ideas, and motivations. there are many stories, many ideas, many thoughts are in my mind, which I share via my blog My philosophy is to share what is I see, what I feel, what I imagine, what I react with people all around me, somewhere out, freelining somewhere far from me, rather than keeping within me.

One thought on “मेरी माँ अलग थी

I am waiting for your feedback -

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s